”कोरोना संकट से निपटने प्राइवेट हेल्थकेयर पीएम के साथ”

  • नारायणा हेल्थ के नॉर्थ रीज़न के डायरेक्टर कमांडर नवनीत बाली से ख़ास बातचीत
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नई दिल्ली। कोरोना संकट के दौरान सरकारी हॉस्पिटल ही नहीं प्राइवेट हॉस्पिटलों की भूमिका भी उतनी ही अहम है. दिन-रात हमारे डॉक्टर इस महामारी को शिकस्त देने और लोगों की जान बचाने में जुटे हैं. बेंगलुरू के नारायणा हेल्थ की पहचान देश में हार्ट सर्जरी के क्षेत्र में अग्रणी रही है. ऐसे समय में नारायण हेल्थ से जुड़े डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना से लड़ने के लिए तत्पर हैं. हिन्दुस्तान ओपिनियन संवाददाता अरविन्द मिश्रा ने इस अवसर पर नारायणा हेल्थ के उत्तर क्षेत्र (नॉर्थ रीज़न) के निदेशक कमांडर नवनीत बाली से ख़ास बातचीत की. जिसमें उन्होंने कहा बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जिस तरह दुनिया से प्राप्त अनुभव के आधार पर लॉकडाउन किया, और कई अहम निर्देश भी जारी किए हैं. इन निर्देशों को जितनी शिद्दत के साथ हम अपनाएंगे, उसी आधार पर कोरोना को हराया जा सकता है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञ के नाते रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने कौन से उपाय साझा करना चाहेंगे?

कमांडर नवनीत बाली : संतुलित आहार और थोड़ा-बहुत एक्सरसाइज़ करते हुए अपने दिमाग को संतुलित रखना, खुश रहना ये कुछ ऐसी बातें हैं, जिसे आप कभी भी और किसी भी परिस्थिति में कर सकते हैं. रही बात आज की परिस्थितियों की तो घर पर रहकर आप एक नहीं हज़ारों नए काम कर सकते हैं. इंटरनेट के इस दौर में रिसर्च वर्क, पढ़ाई करने से लेकर बच्चों के साथ समय बीता सकते हैं. बड़े-बुजुर्गों की सेवा करें. कुछ नए प्रयोग करें.

इस बीमारी से निपटने में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?

कमांडर नवनीत बाली : कोरोना की जंग किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं बल्कि यह देश की समस्या है. सरकार को जहां और जैसे आवश्यकता महसूस हो रही है, प्राइवेट हॉस्पिटलों को शामिल किया जा रहा है. मैं यह कह सकता हूं कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा हर व्यक्ति देश सेवा के लिए पहली पंक्ति में खड़ा मिलेगा.

ऐसे समय में हेल्थ सेक्टर के लिए डिजिटल सेवाएं कितनी कारगर हो रही हैं?

कमांडर नवनीत बाली : आज दुनिया भर के डॉक्टर, वैक्सीन के रिसर्च में लगे लोग वैक्सीन के मॉडल, ईलाज की विधियों और अपने अनुभव को ग्राफिक्स आदि के जरिए एक दूसरे को साझा कर रहे हैं. वैक्सनी को डेवलपम करने का एक प्रोसेस होता है, कई देश क्लीनिकल ट्रायल से आगे निकल रहे हैं, हमें उम्मीद करनी चाहिए कि जल्द ही दुनिया एक कारगर वैक्सीन के जरिए इस संकट से निपटने में सक्षम होगी.

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