कोरोना की जंग को कामयाब बनाएगी BIS की यह पहल..

प्रतीकात्मक फोटो

कोरोना (Covid-19) की जंग में अहम सुरक्षा साधन माने जाने वाले N95 मास्क की मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो ने (BIS) ने एक अहम कदम उठाया है. भारतीय मानक (आईएस 9473) के अनुरूप FFP2 मास्क (जो आमतौर से N95 मास्क के रूप में जाने जाते हैं) के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बीआईएस ने नियमों में कुछ अहम बदलाव किए हैं. N95मास्क के उत्पादन हेतु लाइसेंस प्रदान करने के लिए संपूर्ण इन-हाउस परीक्षण  करने की सुविधा में छूट दी गई है. निर्माता अपने उत्पाद का परीक्षण बीआईएस द्वारा मान्यता प्रयोगशाला या किसी बीआईएस लाइसेंसधारी के पास उपलब्ध परीक्षण-सुविधा से करा सकते हैं. भारतीय मानक के अनुसार N95 मास्क का उत्पादन करने के लिए लाइसेंस लेने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए मास्क निर्माता फर्मों के साथ बीआईएस ने एक एडवोकेसी अभियान भी चलाया है. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के महानिदेशक प्रमोद कुमार तिवारी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मीडिया से कहा, ‘इसके कारण कंपनियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, इसलिए हमने नियमों में ढील दी है. अब वे N95 मास्क बनाने के लिए बाहरी सुविधाओं का उपयोग कर सकती हैं.’

इससे भारतीय मानक के अनुसार FFP2 मास्क का उत्पादन बढ़ाने में भारत की घरेलू क्षमता में उल्लेखनीय रूप से वृद्धि होगी. आपको बता दें कि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा दिए जाने वाले मानक चिन्हों की एक प्रमाणिकता है. ख़ास बात यह है कि सोने में हॉलमार्क के अलावा भी बीआईएस नेशनल बिल्डिंग कोड जैसे अभिनव मानक तैयार कर चुका है. यही नहीं एक डैशबोर्ड भी लांच किया गया है, जो N95 मास्क के निर्माताओं के BIS और गैर बीआइएस दोनों का उनकी लोकेशन के साथ विवरण देगा. इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के उन स्वयं सहायता समूह का विवरण भी उपलब्ध रहेगा जो फेस मास्क का निर्माण कर रहे हैं. बीआईएस के इन प्रयासों से लॉकडाउन के दौरान बिना मानकों का ध्यान रख बड़ी मात्रा में मास्क तैयार किए जाने और उसकी बिक्री पर रोक लगेगी और लोग जागरुक भी होंगे.

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