वोटिंग से पहले एक्जिट पोल करने वालों पर चला आयोग का हंटर

नई दिल्ली। केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने वोटिंग से पूर्व एक्जिट पोल बताने वालों पर शिंकजा कसा है. चुनाव आयोग ने ट्विटर से एग्जिट पोल से संबंधित सभी ट्वीट तत्काल हटाने के लिए कहा है. दरअसल वोटिंग का सातवां चरण अभी समाप्त भी नहीं हुआ था कि कुछ एजेंसियां अपनी पसंदीदा पार्टी को हराने जीताने का एजेंडा लेकर एक्जिट पोल प्रकाशित करती थीं. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ‘‘चुनाव आयोग की तरफ से कोई आदेश पारित नहीं किया गया. हमारे सामने केवल एक मामला आया था, जिसे खुद यूजर ने ही हटा दिया.’’ इससे एक दिन पहले कुछ मीडिया हाउस को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. आरोप था कि इन मीडिया हाउस ने लोकसभा चुनाव के अनुमानित नतीजों को लेकर एक सर्वे प्रकाशित किया था.

क्या कहता है नियम

  • रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट की धारा 126ए में एक्जिट पोल के विषय में विस्तृत वर्णन एवं दिशानिर्देश दिया गया है.
  • नियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति या संस्था चुनाव के दौरान किसी भी तरह के एग्जिट पोल को प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित या उसका प्रचारित नहीं कर सकता.
  • चुनाव का वक्त पहले दिन की वोटिंग से शुरू होकर अंतिम दिन के मतदान के आधे घंटे के बाद तक माना जाता है.
  • इस दौरान किसी भी तरह के एग्जिट पोल के प्रकाशन की अनुमति नहीं होती.
  • अगर कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसे जेल जाना पड़ सकता है. इसकी अवधि दो साल तक हो सकती है. साथ ही जुर्माना या जेल के साथ जुर्माने की सजा हो सकती है। अंतिम चरण का मतदान 19 चरण को है.

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