मिलिए मऊ के ‘सोनू सूद’ से, जानिए कैसे जीता दिहाड़ी मज़दूरों का दिल

बृजेश आर्य मुंबई में लोगों की मदद करते हुए

मुंबई से रंजीत कुमार। कोरोना की वैश्विक महामारी की वजह से मजदूरों और दिहाड़ी श्रमिकों की बदहाली और बेबसी की तस्वीरें हर दिन आपके सामने आ रही होेंगी. पिछले तीन महीने से हालात सामान्य न होने की वजह से कई जगहों पर उनके पास न राशन है और न ही मकान मालिक को किराया देने के लिए पैसे. यही वजह है कि लॉकडाउन में रियायत दिए जाने और अनलॉक की ओर बढ़ते हुए भी देश के कोने-कोने से लोग अपने गांव की ओर पलायन को मज़बूर हो रहे हैं. मुंबई से यह पलायन सबसे अधिक है. लेकिन इसके बाद भी सरकारों की बदइंतजामी और उदासीनता के बीच लोग अपने स्तर पर इन प्रवासी मज़दूरों को उनके घर वापस भेजने के लिए पूरी शिद्दत से जुटे हैं. ये बात और है कि अब तक आपने मशहूर अभिनेता सोनू सूद की मदद से मज़दूरों को सुरक्षित घर भेजे जाने की मुहिम को ही देखा होगा. आज हम आपको यूपी के मऊ के ‘सोनू सूद’ से मिलवा रहे हैं.

मऊ जिले के घोसी कस्बे के रहने वाले बृजेश आर्य अभिनेता सोनू सूद की तरह मुंबई के प्रवासी मज़दूरों की मदद कर रहे हैं. लेकिन मीडिया की लाइम लाइट से दूर रहकर. बृजेश ने अपनी संस्था पहचान और इंडो ग्लोबल सोशल सर्विस सोसाइटी के साथ मिलकर 6 बसों में यूपी और एमपी के सैकड़ा भर से अधिक मजदूरों को उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाया है.

गांव पहुंचे लोगों ने बृजेश को दी दुआएं

खास बात ये है कि बसों में सवार मजदूरों को मास्क दिया गया और सोशल डिस्टेंसिग भी ख्याल रखा गया. दिन रात लगातार सफर के बाद जब मजदूर जब अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं तो उनकी खुशी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. घर पहुंचने के बाद लोग कह रहे हैं…”मजदूरों की इतनी चिंता तो देवदूत ही कर सकते हैं, वो जीवन भर इस सफर को याद रखेंगे. मुम्बई से मऊ पहुंचने तक कोई दिक्कत न हो, इसके लिए बृजेश भैय्या ने बस में खाने पीने का पूरा इंतजाम किया”

बृजेश आर्य कहते हैं कि पिछले 3 दिनों से मुम्बई से यूपी क घोसी, मऊ, जौनपुर, प्रयागराज
लखनऊ, फैजाबाद जबकि मध्यप्रदेश के रीवा, सतना, बैतूल के मजदूरों को पहुंचाया जा रहा है.
आगे और भी मजदूरों को घर पहुंचाने की कोशिशें जारी रहेगी. आपदा में सेवा करने का अवसर मिला है, ये सौभाग्य की बात है. सेवा से सकारात्मकता का भाव आता है’ आपको बता दें कि बृजेश एक दशक से मुम्बई में बेघरों के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं. काशी विद्यापीठ से पढ़ाई के बाद उन्होंने अपना जीवन गरीबों, मजदूरों और बेघरों की सेवा में
समर्पित कर दिया.

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